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आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूले / Aankhon Ko Wo Pur Kaif Nazare Nahin Bhoole

आँखों को वो पुर-कैफ़ नज़ारे नहीं भूले वो दिन जो मदीने में गुज़ारे नहीं भूले फिर कीजे करम, या नबी ! हसनैन का सदक़ा शहर आप का ये दर्द के मारे नहीं भूले बेचैन है, इक बार उठे फिर वही उँगली महताब को आक़ा के इशारे नहीं भूले गिर जाऊँ मैं जी चाहे मेरा फिर से भँवर में आक़ा ने दिए थे जो सहारे नहीं भूले इस्लाम के गुलशन को बचाया था जिन्हों ने कर्बल को वो ज़हरा के दुलारे नहीं भूले तयबा की हसीं रात में, फ़ारूक़ी ! हमारी तक़दीर के चमके जो सितारे नहीं भूले शायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी क़ारी शाहिद महमूद aankho.n ko wo pur-kaif nazaare nahi.n bhoole wo din jo madine me.n guzaare nahi.n bhoole phir keeje karam, ya nabi ! hasnain ka sadqa shehr aap ka ye dard ke maare nahi.n bhoole bechain hai, ik baar uThe phir wahi ungli mahtaab ko aaqa ke ishaare nahi.n bhoole gir jaau.n mai.n jee chaahe mera phir se bhanwar me.n aaqa ne diye the jo sahaare nahi.n bhoole islaam ke gulshan ko bachaaya tha jinho.n ne karbal ko wo zahra ke dulaare nahi.n bhoole ta...

बटता है काइनात में सदक़ा बतूल का / Batta Hai Kainat Mein Sadqa Batool Ka

बटता है काइनात में सदक़ा बतूल का सुल्तान-ए-दो-जहान है बाबा बतूल का सच है कि मेरी अम्माँ भी उन की कनीज़ है मेरा है बाप-दादा भी मँगता बतूल का रहती हैं मेरी देख लो मौजें लगी हुई मुझ पर करम हुआ है ये कैसा बतूल का शामी बाज़ार-ए-शाम में हैरान थे खड़े क़ुरआन पढ़ रहा था बेटा बतूल का मौला 'अली ने कह दिया ज़हरा की शान में अल्लाह ही जानता है रुत्बा बतूल का नज़रों से मैं ने चूमा है चौखट को बार-बार देखा है मैं ने बारहा हुजरा बतूल का अजमल की है तौक़ीर भी, पहचान भी यही अदना सा इक ग़ुलाम है ज़हरा बतूल का शायर: यासीन अजमल चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: ख़ावर नक़्शबंदी रैहान क़ुरैशी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी baT.ta hai kaainaat me.n sadqa batool ka sultaan-e-do-jahaan hai baaba batool ka sach hai ki meri ammaa.n bhi un ki kaneez hai mera hai baap-daada bhi mangta batool ka rehti hai.n meri dekh lo mauje.n lagi hui mujh par karam huwa hai ye kaisa batool ka shaami baazaar-e-shaam me.n hairaan the kha.De qur.aan pa.Dh raha tha beTa batool ka maula 'ali ne keh diya zah...

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ | मेरा मुस्तफ़ा है / Wo Mah-e-Farozan Wo Nayyar-e-Taaban | Mera Mustafa Hai

वो माह-ए-फ़रोज़ाँ वो नय्यर-ए-ताबाँ मेरा मुस्तफ़ा है, मेरा मुस्तफ़ा है वो बारह रबी'-उल-अव्वल को आया जो अव्वल बना है, मेरा मुस्तफ़ा है तो क्या तू ने देखा वो आना वो जाना कि हैरत में है अब तलक ये ज़माना वो रब का बुलाना, तो सब को दिखाना ये जो आ रहा है, मेरा मुस्तफ़ा है क़ुदसी खड़े हैं हैरान हो के कि सिदरा से आगे बशर जा रहा है जाता है देखो वो बे-ख़ौफ़ कैसे कि सब जानता है ये राहें वो जैसे वो यूँ जा रहा है, जैसे कि कोई घर वाला अपने ही घर जा रहा है वो क़िस्सा हलीमा के आँगन का देखो जवानी से पहले तुम बचपन का पूछो अभी मुस्तफ़ा ने उठाई है उँगली क़मर से तो पूछो किधर जा रहा है कहाँ तू, ऐ शाकिर ! कहाँ उन की ना'तें कहाँ अपनी ज़ातें, कहाँ उन की बातें ये क्यूँ कह रहे हो बशर जा रहा है हक़ीक़त में ख़ैर-उल-बशर जा रहा है ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहीद महमूद क़ादरी wo maah-e-farozaa.n wo nayyar-e-taabaa.n mera mustafa hai, mera mustafa hai wo baarah rabi'-ul-awwal ko aaya jo awwal bana hai mera mustafa hai to kya tu ne dekha wo aana wo jaana ki hairat me.n hai ab talak ye...

निराली है जो दुनिया से वो शफ़क़त बाप करता है / Nirali Hai Jo Duniya Se Wo Shafqat Baap Karta Hai

निराली है जो दुनिया से वो शफ़क़त बाप करता है अनोखी अपने बच्चों से मोहब्बत बाप करता है ये बच्चे 'उम्र भर इस का भी बदला दे नहीं पाते अकेला एक दिन में जितनी मेहनत बाप करता है सभी रिश्ते भी प्यारे हैं मगर औलाद की ख़ातिर किसी से जो नहीं होती वो हिम्मत बाप करता है कभी सोचा भी है तुम ने, खिलौने तोड़ने वालो ! तुम्हारे ख़्वाब होते हैं हक़ीक़त बाप करता है ज़माने की सभी मजबूरियों से लड़ के, फ़ारूक़ी ! सभी बच्चों की पूरी हर ज़रुरत बाप करता है शायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ी ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी अज़मत रज़ा भागलपुरी niraali hai jo duniya se wo shafqat baap karta hai anokhi apne bachcho.n se mohabbat baap karta hai ye bachche 'umr bhar is ka bhi badla de nahi.n paate akela ek din me.n jitni mehnat baap karta hai sabhi rishte bhi pyaare hai.n magar aulaad ki KHaatir kisi se jo nahi.n hoti wo himmat baap karta hai kabhi socha bhi hai tum ne, khilaune to.Dne waalo ! tumhaare KHwaab hote hai.n haqeeqat baap karta hai zamaane ki sabhi majbooriyo.n se la.D ke, Fa...

नबी है सहारा हमारा तुम्हारा / Nabi Hai Sahara Hamara Tumhara

नबी है सहारा हमारा तुम्हारा नहीं और चारा हमारा तुम्हारा नबी है सहारा हमारा तुम्हारा अगर उन की नज़र-ए-'इनायत न होती न होता गुज़ारा हमारा तुम्हारा नबी है सहारा हमारा तुम्हारा रसूल-ए-मुकर्रम ने तशरीफ़ ला कर मुक़द्दर सँवारा हमारा तुम्हारा नबी है सहारा हमारा तुम्हारा यक़ीनन ये मुर्शिद का सदक़ा है, आसी ! बना काम सारा हमारा तुम्हारा नबी है सहारा हमारा तुम्हारा ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी nabi hai sahaara hamaara tumhaara nahi.n aur chaara hamaara tumhaara nabi hai sahaara hamaara tumhaara agar un ki nazar-e-'inaayat na hoti na hota guzaara hamaara tumhaara nabi hai sahaara hamaara tumhaara rasool-e-mukarram ne tashreef la kar muqaddar sanwaara hamaara tumhaara nabi hai sahaara hamaara tumhaara yaqeenan ye murshid ka sadqa hai, Aasi ! bana kaam saara hamaara tumhaara nabi hai sahaara hamaara tumhaara Naat-Khwaan: Qari Shahid Mehmood Qadri हिन्दी ENG اردو

या नबी सब करम है तुम्हारा ये जो वारे नियारे हुए हैं / Ya Nabi Sab Karam Hai Tumhara Ye Jo Ware Niyare Hue Hain

या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं अब कमी का तसव्वुर भी कैसा, जब से मँगते तुम्हारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं कोई मुँह न लगाता था हम को, पास तक न बिठाता था हम को जब से थामा है दामन तुम्हारा, दुनिया वाले हमारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं उन के दरबार से जब भी मैं ने, पंजतन के वसीले से माँगा मुझ को ख़ैरात फ़ौरन मिली है, ख़ूब मेरे गुज़ारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं दूर होने को है अब ये दूरी, उन की चौखट पे होगी हुज़ूरी ख़्वाब में मुझ को आक़ा के दर से हाज़री के इशारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं देख कर उन के रौज़े के जल्वे, मुझ को महसूस ये हो रहा था जैसे मंज़र ये सारे के सारे आसमाँ से उतारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं हश्र के रोज़ जब मेरे आक़ा उम्मती की शफ़ा'अत करेंगे रब कहेगा, उन्हें मैं ने बख़्शा जो दिवाने तुम्हारे हुए हैं या नबी ! सब करम है तुम्हारा, ये जो वारे नियारे हुए हैं ख़्वाजा अजमे...

ख़ुदा-वंदा तेरा बंदा तेरे दरबार हाज़िर है | मैं तौबा कर रहा हूँ / Khudawanda Tera Banda Tere Darbar Hazir Hai | Main Tauba Kar Hun

मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! मेरे मौला ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! ख़ुदा-वंदा ! तेरा बंदा तेरे दरबार हाज़िर है कि 'आजिज़ और शर्मिंदा है, कुछ कहने से क़ासिर है अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! न नेकी पास है कोई, न हीला साथ लाया हूँ बस इक महबूब तेरे का वसीला साथ लाया हूँ अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! मैं तौबा कर रहा हूँ, बख़्श दे मेरी ख़ताओं को रहे ईमाँ सलामत, हुक्म दे अपनी 'अताओं को अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! नबी की आल के सदक़े में रहमत 'आम हो जाए तेरे बख़्शे हुए बंदों में मेरा नाम हो जाए अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! मैं अपनी ग़फ़लतों का बरमला ए'तिराफ़ करता हूँ तू फ़रमा, मैं स'ईद -ए-बे-नवा को मु'आफ़ करता हूँ अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! अल्लाह ! मौला ! मेरे मौला ...

लो चाँद नज़र आया मीलाद मुबारक हो / Lo Chand Nazar Aaya Milad Mubarak Ho

Lo Chand Nazar Aaya Milad Mubarak Ho Lyrics in Hindi, English & Urdu मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! आमद-ए-मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! चेहरा-ए-वद्दुहा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो है अब्र-ए-करम छाया, मीलाद मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! बी आमिना के अँगना में आ गए हुज़ूर 'आलम पे नूर बन कर है छा गए हुज़ूर वो रब की 'अता आए, हो सब को मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो आमद-ए-मुस्तफ़ा ! मरहबा मरहबा ! चेहरा-ए-वद्दुहा ! मरहबा मरहबा ! ख़ातमुल-अंबिया ! मरहबा मरहबा ! ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा ! ज़रा प्यार से बोलो ! मरहबा ! ज़रा ज़ोर से बोलो ! मरहबा ! सब झूम के बोलो ! हर साल जश्न-ए-आक़ा यूँ ही मनाएँगे झंडे लगाएँगे, घर को सजाएँगे महबूब-ए-ख़ुदा आए, हो सब हो मुबारक हो लो चाँद नज़र आया, मीलाद मुबारक हो मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! मरहबा मरहबा ! पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-वि...

सुने कौन क़िस्सा-ए-दर्द-ए-दिल मेरा ग़म-गुसार चला गया / Sune Kaun Qissa-e-Dard-e-Dil Mera Gham-gusar Chala Gaya

सुने कौन क़िस्सा-ए-दर्द-ए-दिल, मेरा ग़म-गुसार चला गया जिसे आश्नाओं का पास था, वो वफ़ा-शि'आर चला गया वही बज़्म है, वही धूम है, वही 'आशिक़ों का हुजूम है है कमी तो बस मेरे चाँद की जो तह-ए-मज़ार चला गया वो सुख़न-शनास, वो दूर-बीं, वो गदा-नवाज़, वो मह-जबीं वो हसीं, वो बहर-ए-'उलूम-ए-दीं, मेरा ताजदार चला गया कहाँ अब सुख़न में वो गर्मियाँ कि नहीं रहा कोई क़द्र-दाँ कहाँ अब वो शौक़ में मस्तियाँ कि वो पुर-वक़ार चला गया जिसे मैं सुनाता था दर्द-ए-दिल, वो जो पूछता था ग़म-ए-दुरूँ वो गदा-नवाज़ बिछड़ गया, वो 'अता-शि'आर चला गया बहें क्यूँ, नसीर ! न अश्क-ए-ग़म, रहे क्यूँ न लब पे मेरे फ़ुग़ाँ हमें बे-क़रार वो छोड़ कर, सर-ए-रह-गुज़ार चला गया शायर: पीर नसीरुद्दीन नसीर ना'त-ख़्वाँ: गुल तरफ़ अहमद क़ारी शाहिद महमूद उमैर ज़ुबैर sune kaun qissa-e-dard-e-dil, mera Gam-gusaar chala gaya jise aashnaao.n ka paas tha, wo wafa-shi'aar chal gaya wahi bazm hai, wahi dhoom hai, wahi 'aashiqo.n ka hujoom hai hai kami to bas mere chaand ki jo tah-e...

हश्र में ख़ुद को जो देखूँगा बिखर जाऊँगा / Hashr Mein Khud Ko Jo Dekhunga Bikhar Jaunga

हश्र में ख़ुद को जो देखूँगा बिखर जाऊँगा आप ने गर न सँभाला तो किधर जाऊँगा इतना मानूस हूँ, आक़ा ! मैं तेरे क़दमों से मुझ को क़दमों से किया दूर तो मर जाऊँगा मेरा सर आप की दहलीज़ के क़ाबिल तो नहीं ख़ाक बन कर तेरे क़दमों में बिखर जाऊँगा मेरी हर आस की डोरी दर-ए-पंजतन से जुड़ी बे-ख़तर हो के लहद में मैं उतर जाऊँगा 'आदत-ए-ना'त बहाना है मेरी बख़्शिश का ना'त पढ़ते हुए मैं पुल से गुज़र जाऊँगा मुझ को बस अपने ग़ुलामों में ही रखना, आक़ा ! ये सनद ले के मैं दुनिया से गुज़र जाऊँगा इस से बढ़ कर नहीं ए'ज़ाज़ कोई और, ज़िया ! लोग तेरा ही कहेंगे मैं जिधर जाऊँगा शायर: रफ़ीक़ ज़िया क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरी हाफ़िज़ तसव्वर अत्तारी मुहम्मद वक़ार अत्तारी असद रज़ा अत्तारी hashr me.n KHud ko jo dekhunga bikhar jaaunga aap ne gar na sambhaala to kidhar jaaunga itna maanoos hu.n, aaqa ! mai.n tere qadmo.n se mujh ko qadmo.n se kiya door to mar jaaunga mera sar aap ki dehleez ke qaabil to nahi.n KHaak ban kar tere qadmo.n me.n bikhar jaaunga meri har aas ki Dori d...

भटक रहा है क्यूँ आजा हुसैन के दर पर | पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर / Bhatak Raha Hai Kyun Aaja Hussain Ke Dar Par | Pata Milega Khuda Ka Hussain Ke Dar Par

कितना सख़ी है दर मेरे आक़ा हुसैन का खाते हैं लोग आज भी सदक़ा हुसैन का मेरे सख़ी हुसैन के सारे गदाओं की रक्खेगा लाज हश्र में नाना हुसैन का भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर पर पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा किसे पता था फ़ना क्या है और बक़ा क्या है मेरे इमाम ने साबित किया ख़ुदा क्या है यही तो लिक्खा है मौला हुसैन के दर पर पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन तेरी 'इबादत पे नाज़ है सब को सर-ए-सिनाँ पे तिलावत पे नाज़ है सब को जभी तो झुकती है दुनिया हुसैन के दर पर पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा नबी के दीन की ख़ातिर सभी लुटा के चले चले जो कर्ब-ओ-बला से तो सर कटा के चले शहादतों का फ़साना हुसैन के दर पर पता मिलेगा ख़ुदा का हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा हुसैन के दर पर भटक रहा है क्यूँ ? आजा मुहर्रम आता है, लाखों दीवानें इस दर पर ज़माने भर को मिले आब-ओ-दानें इस दर पर नहीं है कोई भी भूका हुसैन के दर पर पता मिलेगा ख़ुद...

मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ | भीक मिलती है आस्ताने से / Main Dar-e-Mustafa Ka Mangta Hoon | Bheek Milti Hai Aastane Se

चलो अच्छा हुआ, काम आ गई दीवानगी अपनी वगर्ना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते ? न जलती शम'अ महफ़िल में तो परवाने कहाँ जाते ? तुम्हारा दर न मिलता तो ये दीवाने कहाँ जाते ? मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से जो गदा है दर-ए-मुहम्मद का, कुछ नहीं माँगता ज़माने से मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से जब कोई बात ना बने तेरी, या नबी या नबी पुकारा कर वो नवाज़ें तो बात बनती है, ऐसे बनती नहीं बनाने से मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से हम तो सदक़ा नबी का खाते हैं, उन की चौखट पे सर झुकाते हैं हर जगह सर बुलंद रहता है, उन की चौखट पे सर झुकाने से मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से आल-ए-अतहार जिस को कहते हैं, वो घराना नबी की आल का है वो मेरे मुस्तफ़ा को प्यारा है, जिस को निस्बत है इस घराने से मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से कितना मुझ पर करम हुज़ूर का है, जब भी तड़पा है दिल ज़ियारत को मुझ को दर पर बुला ही लेते हैं मेरे आक़ा किसी बहाने से मैं दर-ए-मुस्तफ़ा का मँगता हूँ, भीक मिलती है आस्ताने से ...

इक मैं ही नहीं उन पर क़ुर्बान ज़माना है / Ik Main Hi Nahin Un Par Qurban Zamana Hai | Ek Main Hi Nahi Un Par Qurban Zamana Hai

इक मैं ही नहीं, उन पर क़ुर्बान ज़माना है जो रब्ब-ए-दो-'आलम का महबूब यगाना है कल पुल से हमें जिस ने ख़ुद पार लगाना है ज़हरा का वो बाबा है, हसनैन का नाना है उस हाशमी दूल्हा पर कौनैन को मैं वारूँ जो हुस्न-ओ-शमाइल में यकता-ए-ज़माना है 'इज़्ज़त से न मर जाएँ क्यूँ नाम-ए-मुहम्मद पर हम ने किसी दिन यूँ भी दुनिया से तो जाना है आओ दर-ए-ज़हरा पर फैलाए हुए दामन है नस्ल करीमों की, लजपाल घराना है हूँ शाह-ए-मदीना की मैं पुश्त-पनाही में क्या इस की मुझे पर्वा दुश्मन जो ज़माना है ये कह के दर-ए-हक़ से ली मौत में कुछ मोहलत मीलाद की आमद है, महफ़िल को सजाना है क़ुर्बान उस आक़ा पर कल हश्र के दिन जिस ने इस उम्मत-ए-'आसी को कमली में छुपाना है सौ बार अगर तौबा टूटी भी तो हैरत क्या बख़्शिश की रिवायत में तौबा तो बहाना है हर वक़्त वो हैं मेरी दुनिया-ए-तसव्वुर में ऐ शौक़ ! कहीं अब तो आना है न जाना है पुर-नूर सी राहें हैं, गुंबद पे निगाहें हैं जल्वे भी अनोखे हैं, मंज़र भी सुहाना है हम क्यूँ न कहें उन से रूदाद-ए-अलम अपनी जब उन का कहा ख़ुद भी अल्लाह ने माना है महरूम-ए-करम इस को रखिए न सर-ए-महशर जैसा ह...

प्यार दा ए रिश्ता हर साल निभाना ए | जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए / Pyar Da Ay Rishta Har Saal Manana Ay | Jashn-e-Milad Asan Gajj Wajj Ke Manana Ay

Pyar Da Ay Rishta Har Saal Manana Ay Lyrics in Hindi & English मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! मरहबा ! सरकार की आमद ! मरहबा ! दिलदार की आमद ! मरहबा ! आक़ा की आमद ! मरहबा ! दाता की आमद ! मरहबा ! ज़रा झूम के बोलो ! मरहबा ! ज़रा प्यार से बोलो ! मरहबा ! ज़रा झूम झूम के, प्यार प्यार से बोलो बोलो बोलो बोलो ! मरहबा ! प्यार दा ए रिश्ता हर साल निभाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए मँगिए की रब तों हुण थोड़ नहीं कोई, लोको ! माल ते दौलत दी सानूँ लोड़ नहीं कोई, लोको ! मिल गया प्यार ओह्दा कीह होर कमाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए प्यार दा ए रिश्ता हर साल निभाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए लोकी विक जांदे एह शान वी ओह्दी ए जिंद दी कोई गल नईं एह जान वी ओह्दी ए सब कुझ असाँ मदनी आक़ा तों लुटाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए प्यार दा ए रिश्ता हर साल निभाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज के मनाना ए पावें लाए फ़त्वे ते पावें टोक दी रेह पावें लख वारी एह दुनिया रोक दी रेह जश्न दा मौक़ा' ए असाँ घर नूँ सजाना ए जश्न-ए-मीलाद असाँ गज वज ...

लोगों को तो दुनिया में लाखों ही सहारे हैं | हम को यही काफ़ी है सरकार हमारे हैं / Logon Ko To Duniya Mein Lakhon Hi Sahare Hain | Hum Ko Yahi Kafi Hai Sarkar Hamare Hain

लोगों को तो दुनिया में लाखों ही सहारे हैं हम को यही काफ़ी है, सरकार हमारे हैं रख लेना भरम मेरा, महशर में, मेरे आक़ा ! कुछ भी हैं, मेरे आक़ा ! नौकर तो तुम्हारे हैं क़ुर्बान तेरी शान पर, हसनैन के नाना ! सदक़ा तेरे ना'लैन का मेरे भी गुज़ारे हैं पंजतन के घराने का जब से मैं हुआ नौकर उस वक़्त से फिर अपने वारे ही नियारे हैं उन पर हैं 'अयाँ 'ऐब मेरे, बस एक तसल्ली है सरकार हमारे हैं बस सरकार हमारे हैं रहते हैं सदा नूर की मानिंद मेरे दिल में वो दिन जो, ज़िया ! मैं ने तयबा में गुज़ारे हैं ना'त-ख़्वाँ: आज़म क़ादरी शहबाज़ क़मर फ़रीदी क़ारी शाहिद मेहमूद logo.n ko to duniya me.n laakho.n hi sahaare hai.n ham ko yahi kaafi hai, sarkaar hamaare hai.n rakh lena bharam mera, mehshar me.n, mere aaqa ! kuchh bhi hai.n, mere aaqa ! naukar to tumhaare hai.n qurbaan teri shaan par, hasnain ke naana ! sadqa tere naa'lain ka mere bhi guzaare hai.n panjtan ke gharaane ka jab se mai.n huaa naukar us waqt se phir apne waare hi niyaare hai.n un par hai 'ayaa.n ...